वो हादसा ही था
जिसने मुझे अंदर से दिया मार ,
टूट चुकी थी मैं ,
हुई थी मेरे जीवन की सबसे बड़ी हार ।
बचा ही नहीं सकी अपनी बच्ची को,
इन काफीरों ने उसे मार डाला ,
वो फल नसीब हुआ ही कहाँ ?
जिसके पेड़ को अपने हाथो से बढ़ाया और पाला ।
वो रोने की अावाज ,
वो खिलखिलाती हंसी,
सुनने के लिए तरसते थे कान,
क्या किमत है मां के ममता की ,
और कहाँ वो ननही सी जान ?
जो ये दुनिया देखने से पहले ही
छोड़ गई अपने प्राण ।
आंखो से ये अांसु , अब रुकते कहाँ है,
भावनाअों की कोई कीमत नहीं ?
ये कैसा जहां है ?
जिसने मुझे अंदर से दिया मार ,
टूट चुकी थी मैं ,
हुई थी मेरे जीवन की सबसे बड़ी हार ।
बचा ही नहीं सकी अपनी बच्ची को,
इन काफीरों ने उसे मार डाला ,
वो फल नसीब हुआ ही कहाँ ?
जिसके पेड़ को अपने हाथो से बढ़ाया और पाला ।
वो रोने की अावाज ,
वो खिलखिलाती हंसी,
सुनने के लिए तरसते थे कान,
क्या किमत है मां के ममता की ,
और कहाँ वो ननही सी जान ?
जो ये दुनिया देखने से पहले ही
छोड़ गई अपने प्राण ।
आंखो से ये अांसु , अब रुकते कहाँ है,
भावनाअों की कोई कीमत नहीं ?
ये कैसा जहां है ?
No comments:
Post a Comment